Whispers of Curves: Measuring Forbidden Desires, Khushi, Diristy, and Lab Sir.

Whispers of Curves: Measuring Forbidden Desires, Khushi, Diristy, and Lab Sir.कॉलेज की दो घनिष्ठ सहेलियां, खुशी कुमारी और दिरिस्टि प्रसाद, अपनी बायोलॉजी लैब में सख्त लेकिन आकर्षक प्रोफेसर राजेश शर्मा – जिन्हें सब लैब सर कहते हैं – के साथ एक अनोखे सफर पर निकल पड़ती हैं। शुरूआत शरीर की माप से होती है, जहां टेप की लंबाई-चौड़ाई नापते हुए स्पर्श की चिंगारी सुलगती है। एनाटॉमी के रहस्यों में उलझकर वे एक-दूसरे के शरीर की गहराइयों को छूते हैं, मिरर के फोकल लेंथ में प्रतिबिंबों की मोहकता खो जाते हैं। प्रजनन और आनुवंशिकी के अध्याय में वंश की कामुकता जागृत होती है, तो रसायन विज्ञान के पीएच मापन में तरलों की मिठास घुलमिल जाती है। पांच अध्यायों में बसी यह रोमांटिक और सेक्सी कहानी विज्ञान के बहाने वासना, दोस्ती और जुनून की अनकही दास्तान बुनती है, जहां लैब की ठंडी मेजें गर्म सांसों से सराबोर हो उठती हैं। क्या यह सिर्फ क्लास है, या जीवन का सबसे उत्तेजक प्रयोग? पढ़िए और महसूस कीजिए।

Whispers of Curves: Measuring Forbidden Desires, Khushi, Diristy, and Lab Sir.

अध्याय 1: शरीर की माप – आकर्षण की शुरुआत

खुशी कुमारी और दिरिस्टि प्रसाद कॉलेज की सबसे करीबी दोस्तें थीं। दोनों बीएससी की छात्राएं थीं, और उनकी जिंदगी में एक खास चमक लाते थे लैब सर – प्रोफेसर राजेश शर्मा। लैब सर की उम्र करीब चालीस की थी, लेकिन उनका मजबूत कद-काठी, गहरी भूरी आंखें और हमेशा मुस्कुराती होंठें लड़कियों को बेचैन कर देतीं। खुशी लंबी और सुडौल थी, उसकी गोरी त्वचा और लहराती काली जुल्फें किसी को भी मोह लेतीं। दिरिस्टि थोड़ी छोटी कद की, लेकिन उसकी गोल-मटोल फिगर, चमकदार आंखें और चुलबुला स्वभाव हर किसी का दिल जीत लेता। दोनों अक्सर लैब के बाद कैंटीन में बैठकर गप मारतीं, और बातें लैब सर पर आकर रुक जातीं। “दिरिस्टि, सर की वो स्माइल… उफ्फ!” खुशी कहती, तो दिरिस्टि हंसकर जवाब देती, “हां यार, लेकिन उनकी नजरें… जैसे अंदर तक देख लें।”

एक शाम, बायोलॉजी लैब में एक्स्ट्रा क्लास बुलाई गई। कॉलेज के दूसरे स्टूडेंट्स चले गए थे, सिर्फ खुशी और दिरिस्टि बचीं। लैब सर ने दरवाजा बंद किया और बोले, “आज हम ह्यूमन एंथ्रोपोमेट्री सीखेंगे। शरीर की सटीक माप – लंबाई, चौड़ाई, सब कुछ। यह विज्ञान का मूल है, लेकिन… प्रकृति का भी रहस्य।” उनकी आवाज में एक गहरा, सेक्सी लहजा था, जो हवा में घुल गया। खुशी ने शरमाते हुए पूछा, “सर, क्या हम… खुद की माप लेंगी?” सर ने मुस्कुराते हुए एक लंबा टेप मेजर निकाला। “बिल्कुल, खुशी। शुरू करते हैं। कौन पहले?”

खुशी ने हिचकिचाते हुए आगे बढ़ा। सर ने पहले उसकी ऊंचाई मापी – 5 फुट 7 इंच। फिर कंधे से कमर तक टेप लपेटा। खुशी की सांसें तेज हो गईं जब सर के मजबूत हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर से छुए। “कमर 26 इंच… इतनी पतली, लेकिन मजबूत। परफेक्ट घंटे का आकार।” सर की उंगलियां हल्के से दब रही थीं, जैसे माप से ज्यादा महसूस कर रहे हों। दिरिस्टि किनारे पर खड़ी होकर देख रही थी, उसकी आंखों में जलन के साथ उत्सुकता। सर ने आगे बढ़ते हुए खुशी की जांघों पर टेप रखा। सॉफ्ट कॉटन की साड़ी के नीचे से थाइज की गर्माहट महसूस हुई। “जांघ का व्यास 22 इंच… इतना नरम, लेकिन टाइट। जैसे दौड़ने के लिए बनीं, या… गले लगाने के लिए।” सर की आवाज भारी हो गई, और खुशी का चेहरा गुलाबी। उसे अजीब सा रोमांच हो रहा था – जैसे विज्ञान और कामुकता का मिलन।

अब दिरिस्टि की बारी। सर ने उसके सलवार के ऊपर से ब्रेस्ट साइज मापा। टेप को कसकर लपेटा, और दिरिस्टि ने कांपते हुए सांस रोकी। “34B… सिमेट्रिकल, उभरे हुए। प्रकृति का सबसे आकर्षक अनुपात।” दिरिस्टि ने आंखें झुकाकर फुसफुसाया, “सर, क्या यह… वैज्ञानिक रूप से सेक्सी है?” सर करीब आए, उनकी सांस दिरिस्टि के गले पर लगी। “हां, दिरिस्टि। यह फाइबोनाची सीरीज जैसा – सुनहरा अनुपात। छूकर देखो तो और मजा आए।” दिरिस्टि का दिल धड़क रहा था। सर ने हिप्स भी मापे – 36 इंच। “गोल, कर्वी… बच्चे पैदा करने के लिए, लेकिन पुरुषों को पागल करने के लिए भी।”

माप चलती रही। सर ने अपनी माप दीं – चेस्ट 42 इंच, लंबाई 6 फुट, और बाइसेप्स 16 इंच। “मेरा बॉडी… स्ट्रॉन्ग, लेकिन सॉफ्ट टच के लिए।” लड़कियां शरमाईं, लेकिन उनकी कल्पनाएं उड़ने लगीं। लैब की लाइट्स डिम हो गईं, हवा में मस्क की खुशबू फैली। सर ने आखिर में दोनों को एक-दूसरे की माप लेने को कहा। खुशी ने दिरिस्टि के थाइज छुए, दिरिस्टि ने खुशी के ब्रेस्ट्स। स्पर्श अनजाने में लंबा हो गया। “ये नंबर्स… सिर्फ आंकड़े नहीं,” सर ने कहा। क्लास खत्म होते-होते तीनों के बीच चिंगारी सुलग रही थी। घर लौटकर खुशी और दिरिस्टि ने फोन पर घंटों बात की। “यार, सर के हाथ… कितने वार्म।” दिरिस्टि बोली। खुशी ने हंसकर कहा, “और वो नजरें… जैसे नंगा कर दें।” रात भर सपने आए – माप के खेल में उलझे हुए, जहां बॉडीज मिलतीं। यह शुरुआत थी एक रोमांटिक, सेक्सी सफर की।

अध्याय 2: एनाटॉमी का रहस्य – स्पर्श की गहराई

अगली सुबह लैब सर की क्लास में हवा पहले जैसी नहीं लगी। कल की माप ने खुशी और दिरिस्टि के मन में तूफान ला दिया था। दोनों दोस्तें एक-दूसरे को देखकर शरमातीं, लेकिन आंखों में वही चमक। लैब सर एंट्री करते ही बोले, “आज एनाटॉमी – ह्यूमन बॉडी की आंतरिक संरचना। मसल्स, टिश्यूज, सब कुछ।” उन्होंने एक बड़ा फीमेल टॉर्सो मॉडल निकाला, लेकिन नजरें लड़कियों पर। “खुशी, दिरिस्टि… कल की माप से तो बाहरी सुंदरता पता चली, आज अंदर की।”

क्लास शुरू हुई। सर ने मॉडल पर पॉइंटर चलाया। “ब्रेस्ट टिश्यूज – लोब्स और डक्ट्स। दूध के लिए, लेकिन सेंसुअलिटी के लिए भी।” खुशी की सांस तेज हो गई। सर ने अचानक कहा, “खुशी, रियल फील के लिए… तुम्हें छूकर समझाऊं?” सवाल इतना बोल्ड था कि दिरिस्टि की आंखें फैल गईं। खुशी ने हां में सिर हिलाया, दिल धड़कते हुए। सर आगे आए, उनके हाथ खुशी के कंधे पर रखे। धीरे-धीरे नीचे सरकाए – ब्लाउज के ऊपर से। “यहां पेक्टोरल मसल्स हैं, जो स्किन को सपोर्ट देते। टच फील करो… नरम, लेकिन सेंसिटिव।” स्पर्श इतना कोमल था कि खुशी की बॉडी में करंट दौड़ गया। उसके होंठ कांपे, “सर… यह एनाटॉमी लग रही है या… कुछ और?” सर ने फुसफुसाया, “दोनों। बॉडी सिर्फ हड्डियां नहीं, फीलिंग्स का समंदर है।”

दिरिस्टि बेचैन हो रही थी। “सर, मेरी टर्न?” सर ने मुस्कुराकर उसे बुलाया। “पेल्विस एरिया – हिप्स और लिगामेंट्स।” दिरिस्टि को मॉडल के पास खड़ा किया, लेकिन हाथ कमर पर। फिर धीरे से हिप्स पर सरकाए। दिरिस्टि ने महसूस किया – सर की उंगलियां गर्म, दबाव सही। “यहां कनेक्टिव टिश्यूज होते हैं, जो मूवमेंट कंट्रोल करते… लेकिन टच से सिहरन भी देते।” सर की सांसें तेज, दिरिस्टि के कान पर लग रही थीं। “तुम्हारी हिप्स… इतनी सॉफ्ट, जैसे सिल्क।” दिरिस्टि का चेहरा लाल, लेकिन बॉडी रिएक्ट कर रही थी। दोनों लड़कियां अब सर के करीब महसूस कर रही थीं। लैब खाली थी, सिर्फ तीनों की सांसें।

सर ने टॉपिक शिफ्ट किया – मेल एनाटॉमी। “अब पुरुष बॉडी।” उन्होंने अपना शर्ट का ऊपरी बटन खोला, चेस्ट दिखाया। “पेक्टोरल मसल्स… फ्लेक्स कैसे होते हैं।” खुशी ने हिम्मत जुटाई, हाथ बढ़ाया। “सर, कितना स्ट्रॉन्ग… गर्म।” दिरिस्टि ने भी छुआ, उंगलियां सरकने लगीं। स्पर्श अब खेल बन गया – हल्के मसाज, फिर किस जैसा। सर ने दोनों को करीब खींचा। “एनाटॉमी किताबों में नहीं, स्पर्श में जिंदा होती है।” उनकी उंगलियां लड़कियों की पीठ पर, नेक पर। खुशी ने सर के चेस्ट पर सिर टिका दिया, दिरिस्टि ने कमर। हवा में इलेक्ट्रिसिटी।

रात ढलते-दलते लैब सर ने दोनों को गले लगाया – एक लंबा, वैज्ञानिक लेकिन जुनूनी गला। “यह बॉडी का रहस्य है… एक-दूसरे में खो जाना।” घर लौटकर खुशी और दिरिस्टि ने वीडियो कॉल की। “यार, सर का टच… मेरी स्किन पर अब भी सिहरन।” दिरिस्टि बोली। खुशी ने सांस लेते हुए कहा, “और वो स्मेल… मस्की, सेक्सी। हमारी दोस्ती अब… कुछ ज्यादा।” सपनों में एनाटॉमी के मॉडल जीवंत हो उठे – सर के साथ उलझते हुए। यह अध्याय स्पर्श की गहराई था, जहां दोस्ती प्यार में बदल रही थी।

अध्याय 3: मिरर का फोकल लेंथ – प्रतिबिंब की मोहकता

फिजिक्स लैब में ट्रांसफर हुआ। लैब सर ने एक बड़ा कन्वेक्स मिरर सेटअप किया। “आज ऑप्टिक्स – फोकल लेंथ कैलकुलेशन। मिरर कैसे इमेज को बड़ा या छोटा करता है।” खुशी और दिरिस्टि की आंखें चमक उठीं – सर की वो ही सेक्सी मुस्कान। “यह विज्ञान है, लेकिन… खुद को देखने का जादू भी।” सर बोले। दोनों लड़कियां कल की एनाटॉमी की याद में खोईं, लेकिन उत्साहित। “खुशी, तुम पहले मिरर के सामने।” सर ने कहा। खुशी ने पोज दिया – साड़ी में कर्व्स उभर आए। मिरर ने इमेज मैग्निफाई की – ब्रेस्ट्स बड़े, हिप्स गोल। “फोकल लेंथ 20 सेमी… देखो, तुम्हारा रिफ्लेक्शन कितना इंटेंस। सेक्सी, बोल्ड।” सर की बात सीधी, लेकिन रोमांटिक। खुशी ने शरमाते हुए कहा, “सर, सच में… इतना बड़ा?”

दिरिस्टि हंस पड़ी, “मेरा भी ट्राई करो न!” सर ने दिरिस्टि को मिरर के पास खींचा। उनका बॉडी हल्का सा सटा। मिरर ने उसके कर्व्स को उभार दिया – जांघें मोटी लगीं, नेक लंबी। सर ने एडजस्टमेंट के बहाने हाथ कमर पर रखा। “फोकल पॉइंट यहां… जहां लाइट्स कन्वर्ज करतीं। लेकिन तुम्हारी बॉडी… लाइट का सोर्स।” दिरिस्टि की सांस तेज, सर की सांस उसके बालों में। खुशी पीछे से देख रही थी – जलन के साथ उत्तेजना। “सर, क्या मिरर झूठ बोलता है?” सर मुड़े, खुशी के गाल पर हल्का सा छुआ। “नहीं, लेकिन फीलिंग्स को बड़ा कर देता है। जैसे हमारा आकर्षण।”

तीनों मिरर के खेल में डूब गए। सर ने खुद को पोज दिया – शर्ट ओपन, मसल्स चमकते। लड़कियां रिफ्लेक्शन को छूने लगीं – जैसे रियल को। “यह कन्वेक्स है, ब्रॉड व्यू देता… हमारी फैंटसी की तरह।” स्पर्श बढ़ा – सर के हाथ लड़कियों की कमर पर, फिर नेक पर। किसेस हुए – मिरर में तीन रिफ्लेक्शन एक जैसे। खुशी ने सर को मिरर से सटाया, दिरिस्टि ने पीछे से। “फोकल लेंथ भूल जाओ… फोकस हम पर।” सर फुसफुसाए। लैब की दीवारें गवाह बनीं – हंसी, सिहरन, किस। मिरर ने सब कुछ दोगुना कर दिया।

क्लास खत्म पर सर बोले, “मिरर सच दिखाता… हमारी मोहकता रियल।” घर पर खुशी और दिरिस्टि बाथरूम मिरर के सामने खड़ीं – सर को याद करतीं। उंगलियां बॉडी पर सरकाईं, फोकल लेंथ की तरह डिजायर फोकस। “यार, कल क्या होगा?” दिरिस्टि बोली। खुशी ने हंसकर कहा, “प्रजनन… उफ्फ!” प्रतिबिंब की मोहकता ने उन्हें और करीब ला दिया।

अध्याय 4: प्रजनन और आनुवंशिकी – वंश की कामुकता

बायोलॉजी लैब एक बार फिर तीनों का अड्डा बन चुकी थी। लैब सर – प्रोफेसर राजेश शर्मा – ने दीवार पर बड़े-बड़े चार्ट टांग दिए थे, जहां प्रजनन तंत्र की डिटेल्स चित्रों में उकेरी गई थीं। ओवरी, स्पर्म, फर्टिलाइजेशन – सब कुछ इतना जीवंत लग रहा था जैसे रियल हो। खुशी कुमारी और दिरिस्टि प्रसाद की आंखें चमक रही थीं। पिछले चैप्टर्स की यादें – माप, स्पर्श, मिरर – उनके मन में घूम रही थीं। सर की मौजूदगी ही काफी थी उनकी बॉडीज को सिहरन देने के लिए। “आज रेप्रोडक्शन और हेरेडिटी,” सर ने गहरी आवाज में कहा, “कैसे जीन ट्रांसफर होते हैं, नई जिंदगी कैसे बनती है। यह विज्ञान नहीं, प्रकृति का सबसे सेक्सी रहस्य है।”

खुशी ने शरमाते हुए पूछा, “सर, क्या हमारा ये आकर्षण… जेनेटिक है? जैसे हम तीनों का बॉन्ड?” सर की आंखें चमकीं। वे करीब आए, खुशी के कंधे पर हाथ रखा। “बिल्कुल, खुशी। तुम्हारी वो गोरी स्किन, लहराती जुल्फें – हेरेडिटरी। और दिरिस्टि की कर्वी हिप्स… वंशानुगत आकर्षण। लेकिन प्रजनन… वह तो मिलन का जादू है।” दिरिस्टि ने हंसकर कहा, “सर, डिटेल्स बताइए न। प्रोसेस कैसे होता है?” सर ने एक 3D मॉडल निकाला – फीमेल रेप्रोडक्टिव सिस्टम। “देखो, ओवरी में एग्स… महीने में एक बार ओव्यूलेशन। बॉडी गर्म हो जाती है, रेडी।” उनका हाथ मॉडल पर सरका, लेकिन नजरें दिरिस्टि पर।

सर ने दिरिस्टि को बुलाया। “तुम्हें फील कराऊं?” दिरिस्टि का दिल धड़का। सर ने उसके पेट पर हल्का सा दबाया, साड़ी के ऊपर से। “यहां यूटरस… बच्चे का घर। लेकिन सेक्स के दौरान… सेंसेशन का सेंटर।” दिरिस्टि की सांसें तेज हो गईं। सर की उंगलियां नीचे सरकीं, पेल्विस पर। “हिप्स ब्रॉड… प्रजनन के लिए परफेक्ट, लेकिन गले लगाने के लिए भी।” दिरिस्टि ने सर की कमीज पकड़ ली, आंखें बंद। खुशी जलन महसूस कर रही थी, लेकिन उत्तेजना ज्यादा। “सर, मेरा भी?” सर मुड़े, खुशी को टेबल पर सटा दिया। उनका हाथ उसके थाइज पर – “ओवरी यहां… स्पर्म का इंतजार।” स्पर्श अब गहरा हो गया। सर ने खुशी का ब्लाउज हल्का सा खींचा, ब्रेस्ट्स पर उंगलियां फेरीं। “मिल्क डक्ट्स… नरमी का स्रोत।”

क्लास अब लेक्चर नहीं, प्रैक्टिकल थी। सर ने अपना शर्ट उतार दिया। “अब मेल साइड। स्पर्म प्रोडक्शन…” उनका चेस्ट नंगा, मसल्स चमकते। दिरिस्टि ने छुआ, “सर, कितना स्ट्रॉन्ग… स्पर्म कैसे बनता?” सर ने फुसफुसाया, “टेस्टिकल्स में… लेकिन उत्तेजना से।” वे तीनों लिपट गए। सर ने खुशी को किस किया – गहरा, जीभों का खेल। दिरिस्टि ने पीछे से सर को गुदगुदाया, हाथ नीचे सरकाया। पैंट के ऊपर से फील किया – हार्ड। “सर… यह स्पर्म का सोर्स?” सर ने हां में सिर हिलाया। वे फ्लोर पर लेट गए। सर ने दिरिस्टि की साड़ी खींची, पैंटी साइड की। उंगली अंदर – “वेजाइना… एग का रास्ता।” दिरिस्टि चीखी, लेकिन आनंद से। खुशी ने सर के पैंट उतारे, मेंबर को मुंह में लिया। चूसना, चाटना – प्रजनन का प्रैक्टिकल। सर की सांसें तेज, “हेरेडिटी… हमारा मिलन नया जीन बनेगा।”

क्लाइमेक्स आया। सर ने खुशी को एंटर किया – धीरे, गहरा। “फर्टिलाइजेशन… जैसे स्पर्म एग से मिले।” थ्रस्ट्स तेज, लैब में इको। दिरिस्टि ने खुद को टच किया, देखते हुए। फिर सर ने दिरिस्टि को लिया – डॉगी स्टाइल, हिप्स पकड़कर। “वंश की कामुकता… अनंत।” स्पर्म बाहर आया – खुशी के पेट पर। तीनों हांफते लेटे। “यह जीन… हमारा प्यार पास होगा।” रात को खुशी और दिरिस्टि ने फोन पर शेयर किया – “यार, सर का मिलन… जादू। हमारी दोस्ती अब वंश जैसी।” सपनों में प्रजनन जारी रहा, सेक्सी और रोमांटिक।

अध्याय 5: रसायन विज्ञान का पीएच – तरल की मिठास

केमिस्ट्री लैब में हवा पहले से ज्यादा गर्म लग रही थी। लैब सर ने पीएच मीटर, टेस्ट ट्यूब्स और माइक्रोस्कोप सेट कर दिए थे। “आज बायोकेमिकल एनालिसिस – सेमेन और वेजाइनल फ्लूइड का पीएच। विज्ञान प्राइवेट नहीं मानता, खासकर हम तीनों के बीच।” खुशी और दिरिस्टि की बॉडीज पहले से ही रिएक्ट कर रही थीं। चैप्टर 4 की याद – सर का मिलन – उन्हें बेचैन कर रही थी। “सर, यह… कितना इंटेंस?” दिरिस्टि ने शरमाते हुए पूछा। सर ने आंख मारकर कहा, “पीएच बैलेंस… लेकिन पैशन अनबैलेंस्ड। शुरू करते हैं।”

पहले सिंथेटिक सैंपल्स। सर ने बोला, “सेमेन का पीएच 7.2 से 8.0 – अल्कलाइन, स्पर्म को प्रोटेक्ट करता। वेजाइनल 3.8 से 4.5 – एसिडिक, इन्फेक्शन से बचाव।” लेकिन जल्दी रियल टेस्ट। सर ने दरवाजा लॉक किया। “खुशी, तुम्हारा फ्लूइड पहले।” खुशी को टेबल पर लिटाया, साड़ी ऊपर की। सर की उंगलियां अंदर – गीला, गर्म। “ओह… रेडी।” मीटर डुबोया – “4.2… परफेक्ट, स्वीट एसिड।” खुशी की सिहरन बढ़ी। सर ने उंगली चाटी, “मिठास… विज्ञान से ज्यादा।” दिरिस्टि ने देखा, खुद गीली हो गई। “सर, मेरा?” सर ने दिरिस्टि को खींचा, पैंटी उतारी। उंगली एक्सप्लोर – “3.9… टाइट, टेस्टी।”

अब सर का टर्न। “सेमेन… प्रोड्यूस करना पड़ेगा।” लड़कियां घुटनों पर। खुशी ने सर का जिपर खोला, मेंबर बाहर – हार्ड, पल्सिंग। “सर… इतना बड़ा।” मुंह में लिया, चूसा। दिरिस्टि ने बॉल्स लिकीं, चाटीं। सर की सांसें तेज, हाथ बालों में। “यह… स्पर्म प्रोडक्शन।” वे अल्टरनेट – खुशी चूसती, दिरिस्टि लिक। सर ग्रोन्ड, “क्लोज…” स्पर्म बाहर – लेकिन वे रुक गईं। एक टेस्ट ट्यूब पकड़ी। “सैंपल कलेक्ट।” सर ने खुद को पकड़ा, शूट किया – सफेद, गाढ़ा। ट्यूब में गिरा। “अच्छा अमाउंट… 7.5 पीएच। स्ट्रॉन्ग, मस्की।”

अब माइक्रोस्कोप। सर ने ट्यूब से ड्रॉप लिया, स्लाइड पर। “देखो, स्पर्म्स – टेल वाले, स्विमिंग।” खुशी ने आई लगाया, “सर… कितने एक्टिव। जैसे आप।” दिरिस्टि ने भी देखा, “हमारे अंदर घुसने को रेडी।” उत्तेजना चरम। सर ने कहा, “मिक्स करें?” खुशी की वेजाइनल फ्लूइड ट्यूब में डाला, सर के स्पर्म से मिलाया। माइक्रोस्कोप पर – “देखो, स्पर्म एग की तलाश… फर्टिलाइजेशन।” लेकिन रियल में – सर ने खुशी को एंटर किया, टेबल पर। थ्रस्ट्स – गहरा, तेज। “पीएच बैलेंस… मिलन।” दिरिस्टि ने सर के नेक पर किस, खुद को फिंगर। क्लाइमेक्स – सर अंदर रिलीज, स्पर्म बहा। दिरिस्टि को लिया – मिशनरी, लेग्स रैप। “तरल की मिठास… हमारी।” स्पर्म बाहर, ट्यूब में कलेक्ट – मिक्स्ड सैंपल। माइक्रोस्कोप पर – “हेरेडिटी का स्टार्ट।”

तीनों थककर लिपटे। पीएच मीटर भूल, पैशन जीता। “यह रसायन… हमारा लव,” सर फुसफुसाए। घर लौटकर खुशी और दिरिस्टि ने शेयर किया – “यार, स्पर्म्स देखकर… उत्तेजना डबल। सर का सैंपल… हमारा ट्रॉफी।” स्टोरी खत्म, लेकिन सफर सेक्सी जारी।

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