Wild Crab Story जंगली क्रैब का हंगामा

Wild Crab Story, जंगली क्रैब का हंगामा:

Wild Crab Story|जंगली क्रैब का हंगामा

बायोलॉजी लैब की ठंडी हवा में, डॉ. राहुल और उनकी सहयोगी सिमरन गहरी एकाग्रता से काम कर रहे थे। लैब की दीवारें चमचमाती शीशे की अलमारियों से भरी हुईं थीं, जिनमें सैकड़ों समुद्री जीव—झींगे, स्टारफिश, सील्स और अन्य सी एनिमल्स—ग्लास जारों में सुरक्षित पैक थे। हल्की रोशनी में माइक्रोस्कोप की किरणें चमक रही थीं, और हवा में फॉर्मेलिन की हल्की गंध फैली हुई थी। आज का एक्सपेरिमेंट खास था: एक जीवित फ्रॉग का डिसेक्शन।

“राहुल, देखो, इसकी नसिकाएं कितनी साफ दिख रही हैं,” सिमरन ने उत्साह से कहा, जबकि राहुल स्कैल्पेल से फ्रॉग की त्वचा को सावधानी से काट रहे थे। वे दोनों पीएचडी स्टूडेंट्स थे, जो समुद्री जीवों के व्यवहार पर रिसर्च कर रहे थे। लैब शांत थी, सिर्फ टाइमर की टिक-टिक और उनके फुसफुसाते संवादों की आवाज गूंज रही थी।Wild Crab Story

अचानक, एक जोरदार शोर हुआ—जैसे कांच का टूटना। दोनों चौंक पड़े। अलमारी की तरफ मुड़े तो देखा: एक बड़ा-सा क्रैब, जो जार में कैद था, अपनी मजबूत चिमटियों से बोतल को चूर-चूर कर बाहर निकल आया था। उसकी लाल आंखें चमक रही थीं, और चिमटियां हवा में लहरा रही थीं। “ये कैसे?” सिमरण चिल्लाई, लेकिन क्रैब ने मौका नहीं छोड़ा। वह तेजी से रेंगते हुए टेबल पर कूद गया, फ्रॉग के डिसेक्शन डिश को उलट दिया, और फिर अलमारियों की ओर बढ़ा।Wild Crab Story

लैब में हंगामा मच गया। क्रैब की चिमटियां हर तरफ बिखरीं—वह एक जार को तोड़कर झींगों को आजाद कर देता, तो दूसरे को पटककर स्टारफिश को उछाल देता। कागजात उड़ने लगे, माइक्रोस्कोप गिर गया, और फर्श पर कांच के टुकड़े बिखर गए। “पकड़ो इसे!” राहुल ने चिल्लाया, दस्ताने पहने हाथ से क्रैब की ओर झपटा।

सिमरन ने एक नेट उठाया, लेकिन क्रैब फुर्ती से बच गया। वह टेबल के नीचे से निकला, राहुल के पैर पर चिमटी मार दी—जोर का दर्द हुआ, लेकिन राहुल ने हार न मानी। दोनों ने मिलकर उसे घेरा, सिमरन ने नेट फेंका और क्रैब को पकड़ लिया। लेकिन अगले ही पल, क्रैब ने अपनी ताकत दिखाई—चिमटियां नेट को चीर दीं, और वह दरवाजे की ओर दौड़ा। दरवाजा थोड़ा खुला था; क्रैब बाहर निकल गया!Wild Crab Story

लैब के बाहर, शहर की हलचल भरी सड़क पर शाम ढल रही थी। क्रैब, जो कभी समुद्र की गहराइयों का राजा था, अब जंगली हो चुका था। वह सड़क पर रेंगने लगा, कारों के पहियों से बचते हुए। अचानक, एक साइकिल सवार को देखा—चिमटियां लहराईं, और साइकिल वाला गिर पड़ा। लोग चिल्लाने लगे: “अरे, ये क्या है? क्रैब! इतना बड़ा!” क्रैब ने कहर बरपाना शुरू कर दिया। वह एक दुकान में घुसा, सामान उलट-पलट दिया; फिर एक पार्क में बच्चों के खिलौनों पर हमला किया। लोग भागने लगे, कुछ ने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया।

क्रैब का सफर रुका नहीं। वह एक आवासीय कॉलोनी में घुस गया। पहला घर—एक परिवार डिनर कर रहा था। दरवाजा खुला था; क्रैब अंदर घुसा, टेबल पर चढ़ गया। चम्मच-प्लेटें गिर गईं, बच्चे रोने लगे। “मम्मी, मॉन्स्टर!” मां ने चिल्लाकर सबको बाहर निकाला। क्रैब अगले घर में कूद पड़ा—वहां कुत्ता भौंकने लगा, लेकिन क्रैब की चिमटियों ने उसे भी डरा दिया। पूरे इलाके में दहशत फैल गई। लोग घरों में छुपने लगे, दरवाजे बंद करने लगे। क्रैब हर दरवाजे पर दस्तक दे रहा था, जैसे कोई जंगली जानवर भूखा हो।

समाचार फैलते ही पुलिस और फॉरेस्टर टीम मौके पर पहुंच गई। इंस्पेक्टर सिंह ने रेडियो पर आदेश दिया: “ये कोई साधारण क्रैब नहीं लगता। लैब से भागा है। नेट और जाल तैयार रखो!” फॉरेस्टर, जो वन्यजीव विशेषज्ञ थे, ने कहा, “ये समुद्री प्रजाति है। खतरनाक हो सकता है।” वे सड़कों पर फैल गए, लेकिन क्रैब फुर्तीला था। वह नदी किनारे भागा, जहां शहर की सीमा थी। पानी की लहरें देखते ही वह नदी में कूद पड़ा। गहरे पानी में छुप गया, चिमटियां बंद करके। पुलिस ने नावें उतारीं, लेकिन क्रैब गायब था। रात हो चुकी थी; सर्च ऑपरेशन मुश्किल हो गया।Wild Crab Story

अगली सुबह, हेलिकॉप्टर की गड़गड़ाहट से शहर जाग उठा। वन विभाग का हेलिकॉप्टर नदी पर मंडरा रहा था। पायलट ने स्पॉट किया: क्रैब एक चट्टान के पीछे छुपा था, थका-हारा। हेलिकॉप्टर से नीचे उतारा गया एक विशेष जाल—इलेक्ट्रॉनिक, जो जीवित पकड़ने के लिए डिजाइन किया गया था। फॉरेस्टर ने जाल फेंका; क्रैब ने विरोध किया, लेकिन थकान ने हार मान ली। चिमटियां बंद हो गईं, और वह जाल में फंस गया। “पकड़ लिया!” इंस्पेक्टर ने चिल्लाया।Wild Crab Story

कुछ घंटों बाद, क्रैब वापस उसी बायोलॉजी लैब में था। इस बार, मजबूत स्टील के कंटेनर में। डॉ. राहुल और सिमरन, जो रात भर चिंतित थे, अब राहत की सांस ले रहे थे। “ये सब इसलिए हुआ क्योंकि जार का ढक्कन ढीला था,” सिमरन ने कहा, नोट्स में लिखते हुए। राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा, “अगली बार डबल चेक।

लेकिन ये एक्सपेरिमेंट हमें सिखा गया—समुद्र के राजा को कभी हल्के में न लो।” लैब फिर शांत हो गई, लेकिन अब हर जार पर अतिरिक्त लॉक लग चुके थे। क्रैब? वह अपनी नई ‘जेल’ में चुपचाप बैठा था, शायद अगली साजिश की कल्पना कर रहा था।Wild Crab Story

Leave a Comment